
अमावस्या – 10 अक्तूबर 2026
सूर्योदय पंचांग के अनुसार 10 अक्तूबर 2026 को अमावस्या है। इस तीव्र अंधकार की रात परम्परागत पूजा‑अर्चन का विशेष समय है।
अमावस्या – 10 अक्तूबर 2026
पंचांग के अनुसार अमावस्या का दिन 10 अक्तूबर 2026 है। यह वह रात है जब चाँद पूर्ण रूप से नहीं दिखता और अंधकार का प्रभाव अधिक रहता है। भारतीय जीवन‑शैली में इस रात को विभिन्न धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठानों के लिये महत्व दिया जाता है।
सूर्योदय पंचांग के अनुसार समय
सूर्योदय पंचांग के मुताबिक इस दिन का सूर्योदय 06:19:08 बजे (IST) होगा। इस समय से पहले के अंधकार को शुद्धि, शांति और आरती के रूप में समझा जाता है। लोग इस समय से पहले तैयारी करके शाम के अंधेरे को आध्यात्मिक प्रकाश में बदलने का प्रयास करते हैं।
अमावस्या के धार्मिक महत्व
- अंधकार के अंतिम चरण को भांति‑भांति के दान‑धर्मों से दूर करने का समय माना जाता है।
- गुरु शिवन्याय के अनुसार इस रात को पापों का नाश करने के लिये तंटा‑विचारण का विशेष महत्व है।
- वैदिक शास्त्रों में कहा गया है कि अमावस्यायां योगिनी योगिनी किया जाता है, जिससे मन की शुद्धि होती है।
परम्परागत ध्यान और पूजा
अमावस्यायां लोग अक्सर दीपक जलाकर, पवित्र जल अर्पित करके एवं मंत्रोच्चार करके अपने घर को शुद्ध करते हैं। कई पारिवारिक लोग इस रात को काली माँ की पूजा करते हैं, क्योंकि काली अंधकार को समाप्त करने वाली शक्ति मानी जाती हैं। कुछ क्षेत्रों में जल-रात्रि स्नान भी किया जाता है, जिससे शारीरिक व आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है।
समुदायिक कार्यक्रम और सामाजिक पहल
अमावस्यायां कई समाजिक समूह गोसुत्र, दान‑पात्र अर्पण और भोजन वितरण का आयोजन करते हैं। इस तरह के कार्यों से सामाजिक बंधन मजबूत होते हैं और अंधकार में आशा की किरण बनती है।
आधुनिक समय में अमावस्यायां ध्यान
तकनीक के युग में भी लोग इस रात को मोबाइल, कंप्यूटर आदि का उपयोग कम करके ध्यान‑ध्यान में लिप्त होते हैं। शुद्ध श्वास‑प्रश्वास, मनःस्थिति पर ध्यान और सरल योगिक प्रयोग इस रात के आध्यात्मिक प्रभाव को बढ़ाते हैं।
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