
प्रदोष का पावन दिवस
सूर्योदय पंचांग के अनुसार प्रदोष 24 सितंबर 2026 को है। इस पावन अवसर पर शास्त्रीय विधियों से पूजा अर्चना करके आध्यात्मिक शांति प्राप्त की जा सकती है।
प्रदोष का पावन दिवस
प्रदोष हिन्दू धर्म में शिवलौकिक परम्परा का एक विशेष अनुष्ठान है, जो शुक्ल और कृष्ण चाँद दोनों मास में प्रत्येक शुक्ल-शुक्ति त्रिनेत्री (त्रिपाद) के बाद मनाया जाता है। इस वर्ष का प्रदोष 24 सितंबर 2026 को है, जैसा कि सूर्योदय पंचांग में निर्धारित किया गया है।
सूर्योदय पंचांग के अनुसार तिथि
प्रदोष का पंचांगीय निर्धारण सूर्य के उगने के समय पर आधारित है। इस वर्ष का सूर्य उगना 06:10:40 बजे (IST) निर्धारित किया गया है, जिससे ही 24 सितंबर 2026 को प्रदोष माना गया है। यह समय शास्त्रों में उल्लिखित लाहिरी विधि के अनुसार मान्य है।
प्रदोष का इतिहास और महत्व
प्रदोष का मूल उद्देश्य शिवजी को प्रसन्न करना और पापों से मुक्ति पाना है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन शिवलिंग पर जल एवं कपड़े रखकर प्रार्थना करने से सभी बाधाओं का नाश होता है। विशेष रूप से मंगलवार एवं शनिवार को इस अनुष्ठान का अधिकत्र महत्व माना जाता है।
विधि और रीति-रिवाज
- शिवलिंग की सफाई करें और घी, जल एवं बेलपत्र से अभिषेक करें।
- शिवरात्रि के समय व्रत रखें तथा दात्रि (फली) का प्रसाद अर्पित करें।
- शिवपुराण के श्लोकों का पाठ करें और ॐ त्र्यम्बकं यजामहे के मंत्र का उच्चारण करें।
प्रदोष के लाभ
प्रदोष के दिन की सादगी भरी पूजा-आराधना से मन में शांति आती है, तथा शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। इस दिन किए गए दान और उपवास से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती है।
सुनियोजित समय में सहभागिता
समुदाय में समन्वित रूप से पूजा करने के लिये स्थानीय मंदिर या आध्यात्मिक संगठनों के द्वारा निर्धारित समय का पालन करें। यह न केवल व्यक्तिगत ऊर्जा को बढ़ाता है, बल्कि सामाजिक बंधनों को भी मजबूत करता है।
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