
प्रदोष का पंचांग (8 अक्तूबर 2026)
सूर्योदय पंचांग के अनुसार प्रदोष 8 अक्तूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन के महत्व, लाहिरी, और सामान्य पूजा विधियों का विवरण यहाँ पढ़ें।
प्रदोष 8 अक्तूबर 2026
सूर्योदय पंचांग में तिथि
प्रदोष 8 अक्तूबर 2026 को है, जैसा कि आधिकारिक सूर्यउदय पंचांग में दर्शाया गया है। इस तिथि को प्रदोष के रूप में वर्गीकृत किया गया है और यह विशेष रूप से शिव भक्तों के लिए पावन माना जाता है।
सूर्योदय का समय
एजिन द्वारा दिया गया सूर्यउदय समय 06:18:01 +05:30 है। इस समय के बाद के कुछ देर में ही लाहिरी (सुर्योदय लाहिरी) का अनुष्ठान संपन्न किया जाता है।
प्रदोष के महत्व
प्रदोष वह दिन है जब शनि तथा बृहस्पति के प्रभाव को शांती से दूर करने के लिए विशेष पूजा की जाती है। यह दिन आध्यात्मिक शुद्धि, शत्रु विनाश और परिवार में सुख‑समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
उपवास और लाहिरी
- प्रदोष के दिन उपवास रखने वाले लोग साधारण उपवास या अनाज रहित उपवास कर सकते हैं।
- सूर्योदय के बाद, अर्थात 06:18:01 पर, लाहिरी का जल आरती के साथ किया जाता है।
- लाहिरी में जल, दूध, दही, घी और शुद्ध शकर को मिलाकर पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।
पूजा विधि
प्रदोष की पूजा में मुख्य रूप से शिवलिंग या शिव के चित्र की अराधना की जाती है। आवश्यक सामग्री में निम्नलिखित शामिल हैं:
- सफेद रोली या चंदन
- जल और पंचामृत
- धूप और अगरबत्ती
- निरजत वस्त्रों में पूजा करना
पूजा के क्रम में जल अर्पित करना, पंचामृत से अभिषेक करना, धूप-अगरबत्ती जलाना और शास्त्रों का पाठ करना शामिल है। अंत में प्रसाद के रूप में मोदक या मिठाई वितरित की जाती है।
प्रदोष के लाभ
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, प्रदोष के दिन की शुद्ध पूजा करने से बंधनों का नाश, मानसिक शांति, और आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है। इस दिन की विशेषता यह है कि यह शनि के कष्ट को घटाता है और जीवन में स्थायित्व लाता है।
समापन
प्रदोष 8 अक्तूबर 2026 को अपने पारम्परिक महत्व को समझते हुए, लाहिरी एवं पूजा को सूर्यउदय के बाद 06:18:01 पर पालन किया जाना चाहिए। श्रद्धालु इस पावन दिन को शांति, संकल्प और सकारात्मक ऊर्जा के साथ मनाएँ।
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