संकष्टी चतुर्थी 30 सितंबर 2026
व्रत-त्योहार

संकष्टी चतुर्थी 2026 – पूजा एवं व्रत विधि

संकष्टी चतुर्थी 30 सितंबर 2026 को सूर्यउदय पंचांग के अनुसार है। इस दिन गणेश जी की पूजा व व्रत की विधि यहाँ विस्तृत रूप से दी गई है।

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September 26, 2026
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संकष्टी चतुर्थी 2026 – पूजा एवं व्रत विधि

संकष्टी चतुर्थी का महत्व

संकष्टी चतुर्थी हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है, जहाँ भक्त ग्रहण करते हैं गणेश की कृपा। यह तिथि विशेष रूप से उन लोगों के लिये लाभकारी मानी जाती है जो कठिनाइयों से मुक्त होना चाहते हैं।

व्रत एवं पूजा की तिथि

सूर्योदय पंचांग के अनुसार संकष्टी चतुर्थी 30 सितंबर 2026 पर है। इस दिन व्रत रखने वाले प्रातःकाल 06:13:43 बजे सूर्य उगने के साथ ही पूजा आरम्भ कर सकते हैं। व्रत पूरे दिन निरंपर जल व फल पर ही रहता है, और संध्याकाल स्नान व पुजाअंत के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है।

पूजा विधि व आवश्यक सामग्री

पूजा में मुख्य तत्व हैं:

  • गणेश त्रिशूल व ध्वज
  • नींबू, नारियल, मोती
  • उपवास के लिये फल, कुट्टू, गुड़
  • धूप, अक्षत, सत्तु

इन सबको साफ़ स्थान पर सजाकर, एक पवित्र ऊँची थाली में स्थापित किया जाता है। प्रथम चरण में अंकित शब्दों की जप की जाती है, फिर गणेश जी का सत्संग सुनते हुए धूप‑अक्षत का अर्पण किया जाता है। इस क्रम में त्रिपुंडर (तीन मात्रा में गंधक) का प्रयोग भी किया जा सकता है।

व्रत के लाभ

इसे सफलतापूर्वक रखने पर शारीरिक एवं आध्यात्मिक लाभ होते हैं। मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत धनी‑सम्पन्नता, बाधाओं से मुक्ति, तथा मानसिक शांति प्रदान करता है। व्रती को चाहिए कि वह इस दिन विशेष रूप से शांति एवं सच्ची भक्ति के साथ भगवान गणेश की प्रार्थना करे।

विशेष टिप्स

  • पूजा से पूर्व घर व आंगन को साफ़ व शुद्ध रखें।
  • व्रत का अभिप्राय शुद्ध रखें, किसी भी प्रकार की बुरे विचारों से बचें।
  • पूजा के बाद प्रसाद को सातों दिशा में वितरित करके प्रसन्नता प्राप्त करें।

इन सरल निर्देशों का पालन करके आप संकष्टी चतुर्थी 30 सितंबर 2026 को पूर्ण श्रद्धा एवं आस्था के साथ मनाएंगे और गणेश जी की कृपा प्राप्त करेंगे।

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