
संकष्टी चतुर्थी 29 अक्तूबर 2026 का महत्व
संकष्टी चतुर्थी 29 अक्तूबर 2026 को मनायी जाती है। इस दिन गणेश जी की विशेष व्रत विधि और पूजा का विवरण मिलेगा।
संकष्टी चतुर्थी की तिथि और महत्व
सूर्योदय पंचांग के अनुसार संकष्टी चतुर्थी 29 अक्तूबर 2026 को है। यह तिथि प्रत्येक माह के चतुर्थी तिथि को आता है, जब चंद्रमा शुक्ल पक्ष में चौथा दिवस होता है। इस वर्ष के लिए सूर्योदय का समय 06:31:06 बजे निर्धारित किया गया है, जिससे व्रत की शुरुआत इस समय से पहले करनी होती है।
गणेश जी का सम्बंध
संकष्टी चतुर्थी का मुख्य देवता गणेश हैं। माना जाता है कि यह व्रत ग्रहों की अशुभ प्रभावों को दूर करता है और घर में समृद्धि तथा शांति लाता है। इस विशेष दिन पर गणेश जी की कृपा पाने के लिये भक्त जन विभिन्न विधियों से पूजा‑अर्चना करते हैं।
व्रत की मान्यताएँ
संकष्टी चतुर्थी के व्रत को ठेवने वाले लोग अक्सर शाकाहारी भोजन का सेवन करते हैं और दिन भर पानी नहीं पीते। व्रत का मुख्य उद्देश्य आत्म शुध्दि और मन की शान्ति प्राप्त करना है। व्रत समाप्त होने पर स्नान करके प्रसाद चढ़ाते हैं।
पात्रों की सूची
- गणेश मूरत या चित्र
- सनग्लास (वस्त्र)
- फूल, मोती, और धूप
- प्रसाद के लिये मिठाई (मोदक)
पूजा विधि
पूजा की सही क्रमबद्धता इस प्रकार है:
- स्नान और शुद्धि: सुबह जल्दी स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें।
- गणेश की आरती: दीप जलाकर गणेश जी का पूजन करें और उन्हें मोदक अर्पित करें।
- व्रत कथा: संकष्टी चतुर्थी की कथा सुनें या पढ़ें।
- व्रत तोड़ना: सूर्योदय के बाद, 6:31:06 बजे के समय से पहले हल्का शाकाहारी भोजन करें और जल पिएँ।
संकष्टी चतुर्थी के लाभ
इस व्रत को रखकर भक्तों को विभिन्न प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं, जैसे:
- कामकेन्द्रीय भूलेखों का निवारण।
- परिवार में सुख‑समृद्धि।
- व्यवसाय में वृद्धि और शत्रु शत्रु के प्रभाव का नाश।
सारांश
संकष्टी चतुर्थी 29 अक्तूबर 2026 को विशेष रूप से गणेश जी की कृपा प्राप्त करने का अनुपम अवसर है। सही समय पर व्रत रखकर और पूजा विधि का पालन करके आप इस पावन दिन के वास्तविक फल प्राप्त कर सकते हैं।
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