
Aarti Shri Vrishbhanulali Ki
आरति श्रीवृषभानुलली की।
Radha RaniHindi
यह एक पवित्र आरती है जो भक्ति और श्रद्धा के साथ गाई जाती है।
0 views
॥ देवी राधिका आरती ॥
आरति श्रीवृषभानुलली की।
सत-चित-आनन्द कन्द-कली की॥
भयभन्जिनि भव-सागर-तारिणि,पाप-ताप-कलि-कल्मष-हारिणि,दिव्यधाम गोलोक-विहारिणि,जनपालिनि जगजननि भली की॥
आरति श्रीवृषभानुलली की।
सत-चित-आनन्द कन्द-कली की॥
अखिल विश्व-आनन्द-विधायिनि,मंगलमयी सुमंगलदायिनि,नन्दनन्दन-पदप्रेम प्रदायिनि,अमिय-राग-रस रंग-रली की॥
आरति श्रीवृषभानुलली की।
सत-चित-आनन्द कन्द-कली की॥
नित्यानन्दमयी आह्लादिनि,आनन्दघन-आनन्द-प्रसाधिनि,रसमयि, रसमय-मन-उन्मादिनि,सरस कमलिनी कृष्ण-अली की॥
आरति श्रीवृषभानुलली की।
सत-चित-आनन्द कन्द-कली की॥
नित्य निकुन्जेश्वरि राजेश्वरि,परम प्रेमरूपा परमेश्वरि,गोपिगणाश्रयि गोपिजनेश्वरि,विमल विचित्र भाव-अवली की॥
आरति श्रीवृषभानुलली की।
सत-चित-आनन्द कन्द-कली की॥
आरति श्रीवृषभानुलली की।
सत-चित-आनन्द कन्द-कली की॥
भयभन्जिनि भव-सागर-तारिणि,पाप-ताप-कलि-कल्मष-हारिणि,दिव्यधाम गोलोक-विहारिणि,जनपालिनि जगजननि भली की॥
आरति श्रीवृषभानुलली की।
सत-चित-आनन्द कन्द-कली की॥
अखिल विश्व-आनन्द-विधायिनि,मंगलमयी सुमंगलदायिनि,नन्दनन्दन-पदप्रेम प्रदायिनि,अमिय-राग-रस रंग-रली की॥
आरति श्रीवृषभानुलली की।
सत-चित-आनन्द कन्द-कली की॥
नित्यानन्दमयी आह्लादिनि,आनन्दघन-आनन्द-प्रसाधिनि,रसमयि, रसमय-मन-उन्मादिनि,सरस कमलिनी कृष्ण-अली की॥
आरति श्रीवृषभानुलली की।
सत-चित-आनन्द कन्द-कली की॥
नित्य निकुन्जेश्वरि राजेश्वरि,परम प्रेमरूपा परमेश्वरि,गोपिगणाश्रयि गोपिजनेश्वरि,विमल विचित्र भाव-अवली की॥
आरति श्रीवृषभानुलली की।
सत-चित-आनन्द कन्द-कली की॥