12 सितंबर 2026 का पंचांग
12 सितंबर 2026 · सूर्योदय पंचांग · लाहिरी

दिल्ली
सूर्योदय पंचांग · लाहिरी
तिथि
शुक्ल द्वितीया
नक्षत्र
उत्तर फाल्गुनी · पद 4
योग
Shubha
करण
Balava
सूर्योदय
6:04 am
सूर्यास्त
6:30 pm
चंद्रोदय
7:02 am
चंद्रास्त
7:04 pm
दिन का विवरण
- वार
- Shanivara
- मास
- Bhadrapada
- ऋतु / अयन
- Varsha · Dakshinayana
- चंद्र राशि
- कन्या
वर्ज्य काल
Rahu Kalam
9:11 am से 10:44 am
Yamaganda
1:50 pm से 3:23 pm
Gulika Kalam
6:04 am से 7:37 am
Dur Muhurta 1
6:04 am से 6:54 am
Dur Muhurta 2
6:54 am से 7:44 am
Varjyam
8:27 pm से 10:03 pm
12 सितंबर 2026 का पंचांग
12 सितंबर 2026 को शुक्ल प्रतिपदा, नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी उल्लिखित है। यह दिन शुकरवार को पड़ता है और हलन्ती व्रत तथा कई शुभ कार्यों के लिये अनुकूल माना जाता है। नीचे इस विशेष तिथि के प्रमुख पंचांगीय तत्वों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत है।
मुख्य तिथि एवं नक्षत्र
- तिथि : शुक्ल प्रतिपदा
- नक्षत्र : उत्तर फाल्गुनी
- वार : शुकरवार
माह, ऋतु एवं आयन
- माह : भाद्रपद (अधिक नहीं)
- ऋतु : वर्षा
- आयन : दक्षिणायण
योग व करन
- योग : Shubha (संख्या 23)
- करन : Bava (संख्या 2)
सूर्य व चंद्र स्थितियां
- सूर्य राशि : सिंह
- चंद्र राशि : कन्या
- चंद्र पक्ष : द्वितीय पादा
सूर्योदय, स्नान समय एवं लाहिरी
इस दिन का सूर्योदय 06:04:17 (भारतीय मानक समय) तथा सूर्यास्त 18:31:20 बजे है। चंद्रका उदय 06:02:08 तथा चंद्रका अस्त 18:33:28 बजे है। इन सामयिक आंकड़ों को लाहिरी (सूर्य-चंद्र पथ) गणना में उपयोग किया गया है।
विशेष मुहूर्त
- ब्राह्मा मुहूर्त : 04:28:17 – 05:16:17 (अभिलाषीय)
- अभिजीत मुहूर्त : 11:52:54 – 12:42:42 (अभिलाषीय)
- राहु कलाम : 10:44:25 – 12:17:48 (अभिलाषीय नहीं)
- यमगण्डा : 15:24:34 – 16:57:57 (अभिलाषीय नहीं)
- गुलिक कलाम : 07:37:40 – 09:11:03 (अभिलाषीय नहीं)
- दुर्ग मुहूर्त : 08:33:42 – 09:23:30 (अभिलाषीय नहीं)
- वर्ज्य : 20:27:54 – 22:03:54 (अभिलाषीय नहीं)
व्यावहारिक उपयोग
उपरोक्त पंचांग के आधार पर शुभ कार्य जैसे गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत, अनुक्रमण व्रत आदि इस दिन किया जा सकता है। वहीं, राहु कलाम, यमगण्डा, गुलिक कलाम व वर्ज्य काल में नकारात्मक कार्यों से बचना विवेकपूर्ण माना जाता है।
सारांश
12 सितंबर 2026 की शुक्ल प्रतिपदा, उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र के साथ, शुकरवार के स्वरूप में आती है। योग शुबा एवं करन बव तथा अनेक शुभ मुहूर्त इस दिन को आध्यात्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों के लिये अनुकूल बनाते हैं।