प्रदोष 7 नवंबर 2026
व्रत-त्योहार

प्रदोष 7 नवंबर 2026: पंचांग के अनुसार विवरण

सूर्योदय पंचांग के अनुसार प्रदोष 7 नवंबर 2026 को है। इस तिथि पर उपवास, पूजा और मंत्रजप के विशेष परंपराएँ निभाई जाती हैं।

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November 2, 2026
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प्रदोष 7 नवंबर 2026

सूर्योदय पंचांग के अनुसार प्रदोष 7 नवंबर 2026 को है। यह दिन शुक्ल पक्ष की तृतीया को पड़ता है और शनि एवं भगवान शिव की विशेष कृपा का प्रतीक माना जाता है।

शुरुआत का समय

प्रदोष की शुरुआत सूर्य के उगे समय से होती है। इस वर्ष सूर्य का उगता समय 06:37:39 (आशिया/कोलकाता) दर्शाया गया है, जिससे इस दिन के पवित्र कार्यों की शुरुआत पूर्वसुबह ही अवश्य करनी चाहिए।

उपवास एवं पूजा विधि

प्रदोष के दिन कई भक्त शुद्ध उपवास रखते हैं और शाम को विशेष पूजा करते हैं। प्रमुख उपाय इस प्रकार हैं:

  • स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करना।
  • शिवलिंग या शिव जी की मूर्ति के सामने नीलकंठ रात्रि में जल और बेलपत्र अर्पित करना।
  • तीन बार जप मंत्र ऊँ नमः शिवाय का।
  • भक्तों द्वारा प्रसाद में फल, मिठाई और शुद्ध घी शामिल करना।

प्रसंग व महत्व

प्रदोष वह शुभ समय है जब शनि और शिव की कृपा मिलती है, जिससे कठिनाइयों का निवारण और जीवन में स्थिरता आती है। इस दिन की कथा के अनुसार, शनि भगवान ने अपने शत्रु असुरों को हाराने के लिए शिव जी से आशीर्वाद माँगा था। शिव ने उनका समर्थन किया और असुरों को पराजित कर दिया। यही कारण है कि प्रदोष को शनि-शिव की संयुक्त शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन किए गए कार्यों का फल कई गुना मिलता है। इसलिए भक्त इस दिन विशेष रूप से दान, सेवा और परिवारिक सुख शांति की कामना करते हैं।

विशेष ध्यान रखने योग्य बातें

  • उपवास में केवल शुद्ध आयरन, साबूदाना, और फल को ही खाना चाहिए।
  • भोजन में लहसुन, प्याज़ तथा तिलहन से परहेज़ करना चाहिए।
  • समय पर जल प्रदान करना और जल सेवन को संतुलित रखना आवश्यक है।

इन सभी नियमों का पालन करके भक्त प्रदोष के दिव्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं और शांति एवं सौहार्द के साथ जीवन यापन कर सकते हैं।

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सूर्योदय पंचांग के अनुसार प्रदोष 7 नवंबर 2026 को है। इस तिथि पर उपवास, पूजा और मंत्रजप के विशेष परंपराएँ निभाई जाती हैं।

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