१६ तिथियाँ
शुक्ल और कृष्ण पक्ष की चंद्र तिथियाँ — मुहूर्त का वर्ग, व्रत-पर्व और जन्मफल संकेत।
तिथि क्या है?
तिथि सूर्य और चंद्र के बीच कोणीय दूरी का खंड है — प्रत्येक लगभग १२°। शुक्ल पक्ष में चंद्र बढ़ता है, कृष्ण में घटता है; एक पक्ष में सामान्यतः १५ तिथियाँ।
एक तिथि प्रायः १९–२६ घंटे रहती है; कभी एक नागरिक दिन में दो तिथियाँ, कभी एक तिथि दो दिनों तक फैलती है।
मुहूर्त में पाँच वर्ग चक्र चलता है — नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता, पूर्णा। रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) पर बड़े शुभ आरंभ प्रायः टाले जाते हैं।
शुक्ल पक्ष Shukla Paksha
अन्य नाम: वलक्ष, धवल पक्ष
अमावस्या के बाद से पूर्णिमा तक चंद्रमा बढ़ता है — शुक्ल (उज्ज्वल) पक्ष। व्रत-पर्व की गणना में पक्ष का नाम तिथि के साथ बोला जाता है।
जन्म पक्ष · पुत्र-पौत्रादि सुख, समृद्धि, धर्म और दयालु स्वभाव का शास्त्रीय संकेत।
कृष्ण पक्ष Krishna Paksha
पूर्णिमा के बाद से अमावस्या तक चंद्रमा घटता है — कृष्ण (कृष्णवर्ण / क्षीण) पक्ष। एक ही तिथि नाम दोनों पक्षों में आता है।
जन्म पक्ष · स्वकार्य-लगन और मातृभक्ति का संकेत; विवाद/स्वजन-असहमति की सावधानी — भाग्य-निर्णय न मानें।
जन्म-तिथि फल शास्त्रीय संकेत है — अकेले भाग्य-निर्णय न मानें। व्रत-पर्व और मुहूर्त के नियम अलग-अलग परंपराओं में थोड़े भिन्न हो सकते हैं।
सभी तिथियाँ
प्रतिपदा से चतुर्दशी, फिर पूर्णिमा और अमावस्या। कार्ड पर क्लिक कर मुहूर्त वर्ग, व्रत संकेत और जन्मफल देखें।
1 / १६
प्रतिपदा Pratipada
नये आरंभ, यात्रा-तैयारी, साधारण शुभ कार्य; नंदा वर्ग।
2 / १६
द्वितीया Dwitiya
स्थायी कार्य, संग्रह, गृह-संबंधित साधारण आरंभ; भद्रा वर्ग।
3 / १६
तृतीया Tritiya
विजय-कामना वाले कार्य, कला-आरंभ; जया वर्ग।
4 / १६
चतुर्थी Chaturthi
रिक्ता — बड़े शुभ आरंभ सामान्यतः टालें; साधारण / जारी कार्य ठीक।
5 / १६
पंचमी Panchami
विद्या, नाग-पूजा, सौम्य संस्कार; पूर्णा वर्ग।
6 / १६
षष्ठी Shashthi
स्कंद/षष्ठी व्रत, बच्चों संबंधी सौम्य अनुष्ठान; नंदा वर्ग।
7 / १६
सप्तमी Saptami
सूर्य-संबंधी पूजा, स्वास्थ्य-यात्रा; भद्रा वर्ग।
8 / १६
अष्टमी Ashtami
दुर्गा/कृष्ण जन्माष्टमी जैसे व्रत; जया वर्ग — साहसिक कार्य।
9 / १६
नवमी Navami
रिक्ता — बड़े शुभ आरंभ टालें; राम नवमी जैसे व्रत अलग श्रेणी।
10 / १६
दशमी Dashami
विजय/पूर्णता वाले कार्य, विजयदशमी; पूर्णा वर्ग।
11 / १६
एकादशी Ekadashi
विष्णु व्रत, उपवास, जप-साधना; नंदा वर्ग।
12 / १६
द्वादशी Dwadashi
पारणा (एकादशी के बाद), दान, विष्णु-पूजा; भद्रा वर्ग।
13 / १६
त्रयोदशी Trayodashi
प्रदोष व्रत, शिव-पूजा; जया वर्ग।
14 / १६
चतुर्दशी Chaturdashi
रिक्ता — बड़े शुभ आरंभ टालें; शिवरात्रि/नरक चतुर्दशी जैसे व्रत अलग।
15 / १६
पूर्णिमा Purnima
पूर्णिमा व्रत, गुरु पूर्णिमा, दान-पुण्य; पूर्णा वर्ग / शुक्ल अंत।
16 / १६
अमावस्या Amavasya
पितृ तर्पण, श्राद्ध, मौन-साधना; बड़े मांगलिक आरंभ सामान्यतः टालें।
साथ में देखें
शास्त्रीय वैदिक गणना — मुफ़्त ऑनलाइन टूल। रोज़ का अभ्यास Adhyatmic ऐप्स में।