शतभिषा नक्षत्र (Shatabhisha) — देवता, स्वभाव, फल और नाम अक्षर
शतभिषा — विलक्षण स्मरण; सत्यनिष्ठ — सत्य हेतु बलिदान से न हिचकें; निःस्वार्थ, कोमल हृदय; निर्णय पर अडिग; धार्मिक पुट। क्रोध दुर्ल…
⭕ शतभिषा (Shatabhisha) वैदिक ज्योतिष के २७ नक्षत्रों में 24वाँ नक्षत्र है। देवता वरुण, विंशोत्तरी दशा स्वामी राहु, राशि-सीमा कुंभ 6°40′–20°। अन्य नाम: प्रचोता · शततारका · वरुण · सादे अल मलिक (अरबी)।
शतभिषक्—सौ औषधियाँ। चिकित्सा और रहस्य; वरुण देवता।
देवता वरुण; शत तारका — वृत्त-आकृति।
शास्त्रीय जन्मफल
शास्त्रीय संकेत: कालज्ञ, शांतचित्त, अल्पभोजी और साहसी।
गुण संकेत: शोधकर्ता, उपचारक, स्वतंत्र
आकृति / व्यक्तित्व
अभिजात आभा; कोमल शरीर, आकर्षक आँखें, चौड़ा माथा, किंचित बाहर उदर। जातिकाएं सुंदर।
स्वभाव
विलक्षण स्मरण; सत्यनिष्ठ — सत्य हेतु बलिदान से न हिचकें; निःस्वार्थ, कोमल हृदय; निर्णय पर अडिग; धार्मिक पुट। क्रोध दुर्लभ पर प्रचंड — शीघ्र शांत। प्रदर्शनप्रिय नहीं; संकोच से प्रतिभा छिपती, बातचीत में प्रकट।
शिक्षा / कर्म
साहित्यिक प्रतिभा शीघ्र प्रकाश; उच्च शिक्षा। मनोविज्ञान, स्पर्श-चिकित्सा, ज्योतिष, चिकित्सा में दक्षता।
विवाह · जातक
प्रियजन/भाइयों से मानसिक यातना; माता-पिता स्नेह-संरक्षण। उदारता से लोकप्रिय।
विवाह · जातिका
मूल प्रकृति शांत पर क्रोध प्रचंड — लोग समझ न पाएँ। उदार; विज्ञान रुचि — कुशल चिकित्सक। पति निष्ठा पर वैवाहिक जीवन विशेष सुखी नहीं — लंबे अलगाव योग।
स्वास्थ्य
प्रत्यक्ष स्वस्थ पर चोट असह्य; श्वास, मूत्र रोग, मधुमेह; कामातिरेक सावधानी; शीत से बचें। जातिकाएं छाती/मूत्रमार्ग रोग — सतर्क।
शास्त्रीय स्वास्थ्य-संकेत
शास्त्रीय रोग-संकेत: सन्निपात ज्वर, वात, ज्वर।
नक्षत्र गुण तालिका
| आकृति | खाली चक्र / औषधि · Empty Circle |
|---|---|
| दशा स्वामी | राहु (Rahu) |
| देवता | वरुण (Varuna) |
| सीमा | कुंभ 6°40′–20° |
| स्वभाव | Chara |
| मुख | Tiryang Mukha |
| दृष्टि · तारे · गण | Madhyaksha · 100 · राक्षस |
| खगोलीय नाम | λ Aquarii |
| तमिल · मलयालम | Chathayam · Chathayam |
| संज्ञा | चर/चल — गजाश्वारोहण, गमनागमन, यान चालन आदि |
| मुख-उपयोग | ऊर्ध्वमुख: प्रासाद निर्माण, राज्याभिषेक, ध्वजारोहण, ऊँचाई संबंधी कार्य |
| नेत्र संज्ञा | मंद — खोई वस्तु: प्रयत्न से लाभ |
| योनि · नाड़ी | अश्व · आदि |
नामकरण अक्षर (चरण)
शास्त्रीय चरणाक्षर (देवनागरी), रोमन रूप और चरण स्वामी:
पद 1 मोGo गुरु | पद 2 साSa शनि | पद 3 सीSi शनि | पद 4 सूSu गुरु |
जन्म नक्षत्र कैसे जानें?
जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो, वही जन्म-नक्षत्र माना जाता है। कुंडली से अपना नक्षत्र और पद देखें, अथवा आज का पंचांग पर चंद्र नक्षत्र देखें। सभी नक्षत्र: २७ नक्षत्र सूची।
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आध्यात्मिक / ज्योतिषीय परिचय मात्र — चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।
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