उत्तराषाढ़ा नक्षत्र (Uttara Ashadha) — देवता, स्वभाव, फल और नाम अक्षर

उत्तराषाढ़ा — शुद्ध हृदय, प्रदर्शनरहित, दंभरहित, परोपकारी; नारी जाति सम्मान। ईमानदार, पारदर्शी, निष्ठावान; धोखा न दें न लें। दृढ़ — अन…

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November 22, 2025
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⭐ उत्तराषाढ़ा (Uttara Ashadha) वैदिक ज्योतिष के २७ नक्षत्रों में 21वाँ नक्षत्र है। देवता विश्वेदेवा, विंशोत्तरी दशा स्वामी सूर्य, राशि-सीमा धनु–मकर 26°40′–10°। अन्य नाम: विश्वम् · अल बल्दाह (अरबी)।

स्थायी विजय। लोक–समूह शक्ति; सूर्य स्वामी।

देवता विश्वेदेव; मचान/शैया जैसी चौकोर आकृति।

शास्त्रीय जन्मफल

शास्त्रीय संकेत: मान्य, शांत, गुणवान, सुखी, धनिक और विद्वान्।

गुण संकेत: विजयी, दृढ़, ज्ञानी

आकृति / व्यक्तित्व

सुगठित शरीर, लंबी नाक, चमकीली आँखें; आकर्षक, विनम्र। जातिकाएं भी आकर्षक।

स्वभाव

शुद्ध हृदय, प्रदर्शनरहित, दंभरहित, परोपकारी; नारी जाति सम्मान। ईमानदार, पारदर्शी, निष्ठावान; धोखा न दें न लें। दृढ़ — अनीति के सामने नहीं झुकते। सुविचारित निर्णय; कटु वचन से परहेज; गलती स्वीकार। प्रशंसा की चाह छिपी रह सकती है। २८–३१ महत्वपूर्ण।

शिक्षा / कर्म

उच्च पद पर भी विनय; विवादपूर्ण कार्यों से बचें। जातिकाएं अध्यापन/बैंकिंग।

विवाह · जातक

पारिवारिक सुख; पत्नी स्नेहिल पर स्वास्थ्य पति के लिए चिंता का कारण। बचपन अच्छा, बाद में पारिवारिक झटके।

विवाह · जातिका

जातकों से अधिक हठी; बिना सोचे बोलकर विवाद। वैवाहिक सुख पर पति से अलगाव दुःख देता रहता है।

स्वास्थ्य

उदर रोग और नेत्र विकार सावधानी। जातिकाएं वायु विकार; गर्भाशय शिकायत उपेक्षा न करें।

शास्त्रीय स्वास्थ्य-संकेत

शास्त्रीय रोग-संकेत: कटि पीड़ा, गठिया, प्रलाप मनःस्थिति। पारंपरिक उपचार में कपास-मूल बंधन का उल्लेख।

नक्षत्र गुण तालिका

आकृतिहाथी दाँत (पीछे) · Elephant Tusk (back)
दशा स्वामीसूर्य (Sun)
देवताविश्वेदेवा (Vishvedevas)
सीमाधनु–मकर 26°40′–10°
स्वभावSthira
मुखAdho Mukha
दृष्टि · तारे · गणMadhyaksha · 2 · मनुष्य
खगोलीय नामζ / σ Sagittarii
तमिल · मलयालमUthiraadam · Uthraadam
संज्ञाध्रुव/स्थिर — बीजवपन, गृहारम्भ, बाग-उपवन आदि स्थिर कर्म
मुख-उपयोगऊर्ध्वमुख: प्रासाद निर्माण, राज्याभिषेक, ध्वजारोहण, ऊँचाई संबंधी कार्य
नेत्र संज्ञामंद — खोई वस्तु: प्रयत्न से लाभ
योनि · नाड़ीनकुल · अंत्य

नामकरण अक्षर (चरण)

शास्त्रीय चरणाक्षर (देवनागरी), रोमन रूप और चरण स्वामी:

पद 1
भे
Be
गुरु
पद 2
भो
Bo
शनि
पद 3
जू
Ja
शनि
पद 4
जी
Ji
गुरु

जन्म नक्षत्र कैसे जानें?

जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो, वही जन्म-नक्षत्र माना जाता है। कुंडली से अपना नक्षत्र और पद देखें, अथवा आज का पंचांग पर चंद्र नक्षत्र देखें। सभी नक्षत्र: २७ नक्षत्र सूची

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