अश्विनी नक्षत्र (Ashwini) — देवता, स्वभाव, फल और नाम अक्षर
अश्विनी — अति बुद्धिमान, धनी, विनयशील और यशस्वी माने जाते हैं। शांत दिखते हैं पर निर्णय पर अटल; व्यवहार-कुशल, धैर्यवान किंतु क्रोध…
🐴 अश्विनी (Ashwini) वैदिक ज्योतिष के २७ नक्षत्रों में 1वाँ नक्षत्र है। देवता अश्विनी कुमार, विंशोत्तरी दशा स्वामी केतु, राशि-सीमा मेष 0°–13°20′। अन्य नाम: तुरंग · दस · हय · कैस्टर-पोलक्स (यूनानी) · अश शरातन (अरबी) · लियू (चीनी)।
पहली नक्षत्र। आरंभ, गति और चिकित्सा की ऊर्जा। अधिकांश शुभ कार्यों के लिए अनुकूल मानी जाती है।
देवता अश्विनी कुमार — वैदिक चिकित्सा-देव युगल।
शास्त्रीय जन्मफल
शास्त्रीय संकेत: बुद्धिमान, धनवान, विनयी, यशस्वी और सुखी स्वभाव।
गुण संकेत: तेज़, अग्रणी, सहायक
आकृति / व्यक्तित्व
सुंदर व्यक्तित्व; चौड़ा माथा, कुछ बड़ी नासिका, बड़े चमकीले नेत्र; आकृति अश्व जैसी कल्पित।
स्वभाव
अति बुद्धिमान, धनी, विनयशील और यशस्वी माने जाते हैं। शांत दिखते हैं पर निर्णय पर अटल; व्यवहार-कुशल, धैर्यवान किंतु क्रोध आने पर संयम कठिन। ईश्वर-आस्था पर पाखंड अरुचिकर; स्वच्छताप्रिय।
शिक्षा / कर्म
शिक्षा में सफलता; चिकित्सा, सुरक्षा, इंजीनियरिंग उपयुक्त। साहित्य-संगीत रुचि; प्रदर्शन-प्रिय व्यय से आय-संतुलन पर सावधानी। तीस वर्ष तक संघर्ष संभव।
विवाह · जातक
वैवाहिक जीवन प्रायः सुखी; विवाह योग लगभग २७–३० वर्ष; पुत्र-योग अपेक्षाकृत अधिक। मातृपक्ष सहायक, पिता से कम सहायता।
विवाह · जातिका
आकर्षक, धैर्यवान, मीठी वाणी, परंपराप्रिय। परिवार प्राथमिक। विवाह २३ वर्ष के बाद अनुकूल; विलंब/विछोह की शास्त्रीय सावधानी। पुत्री-योग अधिक।
स्वास्थ्य
जातिकाओं का स्वास्थ्य प्रायः ठीक; चिंता/मानसिक अशांति से व्याधि। मस्तिष्क विकार की सावधानी; रसोई/अग्नि और दुर्घटना से सतर्क रहें।
शास्त्रीय स्वास्थ्य-संकेत
शास्त्रीय रोग-संकेत: वायु, अनिद्रा, मतिभ्रम, ज्वर। पारंपरिक उपचार में चिरचिटा-मूल बंधन का उल्लेख (मंत्र/जप यहाँ नहीं)।
नक्षत्र गुण तालिका
| आकृति | घोड़े का मुख · Horse Face |
|---|---|
| दशा स्वामी | केतु (Ketu) |
| देवता | अश्विनी कुमार (Ashwini Kumara) |
| सीमा | मेष 0°–13°20′ |
| स्वभाव | Kshipra, Laghu |
| मुख | Tiryang Mukha |
| दृष्टि · तारे · गण | Mandaksha · 3 · देव |
| खगोलीय नाम | β / γ Arietis |
| तमिल · मलयालम | Aswini · Aswathi |
| संज्ञा | क्षिप्र/लघु — रतिकर्म, क्रय-विक्रय, शास्त्राभ्यास, आभूषण, शिल्प, ६४ कला |
| मुख-उपयोग | तिर्यङ्मुख: मार्ग निर्माण, यन्त्र, यात्रा/वाहन प्रथम प्रयोग, बीजवपन |
| नेत्र संज्ञा | मंद — खोई वस्तु: प्रयत्न से लाभ |
| योनि · नाड़ी | अश्व · आदि |
| गंडमूल | हाँ — मुहूर्त/जन्म में शास्त्रीय सावधानी |
नामकरण अक्षर (चरण)
शास्त्रीय चरणाक्षर (देवनागरी), रोमन रूप और चरण स्वामी:
पद 1 चूChu मंगल | पद 2 चेChe शुक्र | पद 3 चोCho बुध | पद 4 लाLa चंद्र |
जन्म नक्षत्र कैसे जानें?
जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो, वही जन्म-नक्षत्र माना जाता है। कुंडली से अपना नक्षत्र और पद देखें, अथवा आज का पंचांग पर चंद्र नक्षत्र देखें। सभी नक्षत्र: २७ नक्षत्र सूची।
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आध्यात्मिक / ज्योतिषीय परिचय मात्र — चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।
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