ज्येष्ठा नक्षत्र (Jyeshtha) — देवता, स्वभाव, फल और नाम अक्षर

ज्येष्ठा — निर्मल हृदय, धीर-गंभीर; अंतरात्मा की आवाज पर कार्य — हठी कहलाते हैं। सिद्धांतप्रिय; प्रतिशोध अधिक हो तो आगा-पीछा नहीं। श…

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June 25, 2025
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🛡️ ज्येष्ठा (Jyeshtha) वैदिक ज्योतिष के २७ नक्षत्रों में 18वाँ नक्षत्र है। देवता इंद्र, विंशोत्तरी दशा स्वामी बुध, राशि-सीमा वृश्चिक 16°40′–30°। अन्य नाम: कुलिश तारा · सुरस्वामी · वासव · अल कल्ब (अरबी)।

ज्येष्ठता और अधिकार। वरिष्ठता–सुरक्षा; इंद्र देवता।

देवता इंद्र; कभी वसंत-संपात बिंदु होने से “ज्येष्ठ” कहा गया।

शास्त्रीय जन्मफल

शास्त्रीय संकेत: तीव्र क्रोध और संबंध-आसक्ति की सावधानी; वैभव व धार्मिकता।

गुण संकेत: आज्ञाकारी, सूक्ष्मदर्शी, रक्षक

आकृति / व्यक्तित्व

हृष्ट-पुष्ट, ऊर्जा संपन्न, आकर्षक। जातिकाएं हृष्ट-पुष्ट, लंबी बाहें, घुघराले केश।

स्वभाव

निर्मल हृदय, धीर-गंभीर; अंतरात्मा की आवाज पर कार्य — हठी कहलाते हैं। सिद्धांतप्रिय; प्रतिशोध अधिक हो तो आगा-पीछा नहीं। शीघ्र आजीविका, दूर क्षेत्रों तक। १८–२६ और प्रौढ़ावस्था तक संघर्ष। अहं से परिवार अलग-थलग। मादक पदार्थों से बचें।

शिक्षा / कर्म

निष्ठा से तरक्की; दूरस्थ कार्यक्षेत्र स्वीकार्य।

विवाह · जातक

स्वभाव से पारिवारिक तनाव; पत्नी अंकुश हितकर। सामान्यतः वैवाहिक सुख पर समय-समय पर अलगाव संभव।

विवाह · जातिका

बुद्धिमान, संगठक, गहन स्नेह; छवि बनाए रखने को सतर्क। शिक्षा घर चलाने में। ससुराल त्रास/अफवाह की सावधानी; संबंधियों से वार्ता सावधानी। कलह से बच्चों पर असर।

स्वास्थ्य

बार-बार बुखार, अतिसार, अस्थमा। जातिकाओं को गर्भाशय संबंधी छोटी तकलीफ भी उपेक्षा न करें। गंडमूल।

शास्त्रीय स्वास्थ्य-संकेत

शास्त्रीय रोग-संकेत: पित्त, चित्त व्याकुलता। पारंपरिक उपचार में चिरचिटा-मूल बंधन का उल्लेख।

नक्षत्र गुण तालिका

आकृतिछतरी / कुंडल · Umbrella / Earring
दशा स्वामीबुध (Mercury)
देवताइंद्र (Indra)
सीमावृश्चिक 16°40′–30°
स्वभावTikshna
मुखAdho Mukha
दृष्टि · तारे · गणMadhyaksha · 3 · राक्षस
खगोलीय नामAntares
तमिल · मलयालमKettai · Thrikketta
संज्ञातीक्ष्ण/दारुण — उग्र/भयंकर कर्म, पशु प्रशिक्षण, बन्धन, अग्निकर्म आदि
मुख-उपयोगतिर्यङ्मुख: मार्ग निर्माण, यन्त्र, यात्रा/वाहन प्रथम प्रयोग, बीजवपन
नेत्र संज्ञामध्य — खोई वस्तु: दूर से श्रवण / कठिन प्राप्ति
योनि · नाड़ीमृग · आदि
गंडमूलहाँ — मुहूर्त/जन्म में शास्त्रीय सावधानी

नामकरण अक्षर (चरण)

शास्त्रीय चरणाक्षर (देवनागरी), रोमन रूप और चरण स्वामी:

पद 1
नो
No
गुरु
पद 2
Ya
शनि
पद 3
यी
Yi
शनि
पद 4
यू
Yu
गुरु

जन्म नक्षत्र कैसे जानें?

जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो, वही जन्म-नक्षत्र माना जाता है। कुंडली से अपना नक्षत्र और पद देखें, अथवा आज का पंचांग पर चंद्र नक्षत्र देखें। सभी नक्षत्र: २७ नक्षत्र सूची

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