ज्येष्ठा नक्षत्र (Jyeshtha) — देवता, स्वभाव, फल और नाम अक्षर
ज्येष्ठा — निर्मल हृदय, धीर-गंभीर; अंतरात्मा की आवाज पर कार्य — हठी कहलाते हैं। सिद्धांतप्रिय; प्रतिशोध अधिक हो तो आगा-पीछा नहीं। श…
🛡️ ज्येष्ठा (Jyeshtha) वैदिक ज्योतिष के २७ नक्षत्रों में 18वाँ नक्षत्र है। देवता इंद्र, विंशोत्तरी दशा स्वामी बुध, राशि-सीमा वृश्चिक 16°40′–30°। अन्य नाम: कुलिश तारा · सुरस्वामी · वासव · अल कल्ब (अरबी)।
ज्येष्ठता और अधिकार। वरिष्ठता–सुरक्षा; इंद्र देवता।
देवता इंद्र; कभी वसंत-संपात बिंदु होने से “ज्येष्ठ” कहा गया।
शास्त्रीय जन्मफल
शास्त्रीय संकेत: तीव्र क्रोध और संबंध-आसक्ति की सावधानी; वैभव व धार्मिकता।
गुण संकेत: आज्ञाकारी, सूक्ष्मदर्शी, रक्षक
आकृति / व्यक्तित्व
हृष्ट-पुष्ट, ऊर्जा संपन्न, आकर्षक। जातिकाएं हृष्ट-पुष्ट, लंबी बाहें, घुघराले केश।
स्वभाव
निर्मल हृदय, धीर-गंभीर; अंतरात्मा की आवाज पर कार्य — हठी कहलाते हैं। सिद्धांतप्रिय; प्रतिशोध अधिक हो तो आगा-पीछा नहीं। शीघ्र आजीविका, दूर क्षेत्रों तक। १८–२६ और प्रौढ़ावस्था तक संघर्ष। अहं से परिवार अलग-थलग। मादक पदार्थों से बचें।
शिक्षा / कर्म
निष्ठा से तरक्की; दूरस्थ कार्यक्षेत्र स्वीकार्य।
विवाह · जातक
स्वभाव से पारिवारिक तनाव; पत्नी अंकुश हितकर। सामान्यतः वैवाहिक सुख पर समय-समय पर अलगाव संभव।
विवाह · जातिका
बुद्धिमान, संगठक, गहन स्नेह; छवि बनाए रखने को सतर्क। शिक्षा घर चलाने में। ससुराल त्रास/अफवाह की सावधानी; संबंधियों से वार्ता सावधानी। कलह से बच्चों पर असर।
स्वास्थ्य
बार-बार बुखार, अतिसार, अस्थमा। जातिकाओं को गर्भाशय संबंधी छोटी तकलीफ भी उपेक्षा न करें। गंडमूल।
शास्त्रीय स्वास्थ्य-संकेत
शास्त्रीय रोग-संकेत: पित्त, चित्त व्याकुलता। पारंपरिक उपचार में चिरचिटा-मूल बंधन का उल्लेख।
नक्षत्र गुण तालिका
| आकृति | छतरी / कुंडल · Umbrella / Earring |
|---|---|
| दशा स्वामी | बुध (Mercury) |
| देवता | इंद्र (Indra) |
| सीमा | वृश्चिक 16°40′–30° |
| स्वभाव | Tikshna |
| मुख | Adho Mukha |
| दृष्टि · तारे · गण | Madhyaksha · 3 · राक्षस |
| खगोलीय नाम | Antares |
| तमिल · मलयालम | Kettai · Thrikketta |
| संज्ञा | तीक्ष्ण/दारुण — उग्र/भयंकर कर्म, पशु प्रशिक्षण, बन्धन, अग्निकर्म आदि |
| मुख-उपयोग | तिर्यङ्मुख: मार्ग निर्माण, यन्त्र, यात्रा/वाहन प्रथम प्रयोग, बीजवपन |
| नेत्र संज्ञा | मध्य — खोई वस्तु: दूर से श्रवण / कठिन प्राप्ति |
| योनि · नाड़ी | मृग · आदि |
| गंडमूल | हाँ — मुहूर्त/जन्म में शास्त्रीय सावधानी |
नामकरण अक्षर (चरण)
शास्त्रीय चरणाक्षर (देवनागरी), रोमन रूप और चरण स्वामी:
पद 1 नोNo गुरु | पद 2 यYa शनि | पद 3 यीYi शनि | पद 4 यूYu गुरु |
जन्म नक्षत्र कैसे जानें?
जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो, वही जन्म-नक्षत्र माना जाता है। कुंडली से अपना नक्षत्र और पद देखें, अथवा आज का पंचांग पर चंद्र नक्षत्र देखें। सभी नक्षत्र: २७ नक्षत्र सूची।
संबंधित
सभी २७ नक्षत्र · ज्येष्ठा · राशिफल · मुहूर्त · नक्षत्र लेख
- विशाखा (Vishakha)
- अनुराधा (Anuradha)
- मूल (Mula)
- पूर्वाषाढ़ा (Purva Ashadha)
- उत्तराषाढ़ा (Uttara Ashadha)
- श्रवण (Shravana)
आध्यात्मिक / ज्योतिषीय परिचय मात्र — चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।
Comments (0)