परिचय
ज्येष्ठता और अधिकार। वरिष्ठता–सुरक्षा; इंद्र देवता।
देवता इंद्र; कभी वसंत-संपात बिंदु होने से “ज्येष्ठ” कहा गया।
जन्मफल · शास्त्रीय संकेत: तीव्र क्रोध और संबंध-आसक्ति की सावधानी; वैभव व धार्मिकता।
आकृति
हृष्ट-पुष्ट, ऊर्जा संपन्न, आकर्षक। जातिकाएं हृष्ट-पुष्ट, लंबी बाहें, घुघराले केश।
स्वभाव
निर्मल हृदय, धीर-गंभीर; अंतरात्मा की आवाज पर कार्य — हठी कहलाते हैं। सिद्धांतप्रिय; प्रतिशोध अधिक हो तो आगा-पीछा नहीं। शीघ्र आजीविका, दूर क्षेत्रों तक। १८–२६ और प्रौढ़ावस्था तक संघर्ष। अहं से परिवार अलग-थलग। मादक पदार्थों से बचें।
शिक्षा / कर्म
निष्ठा से तरक्की; दूरस्थ कार्यक्षेत्र स्वीकार्य।
विवाह · जातक
स्वभाव से पारिवारिक तनाव; पत्नी अंकुश हितकर। सामान्यतः वैवाहिक सुख पर समय-समय पर अलगाव संभव।
विवाह · जातिका
बुद्धिमान, संगठक, गहन स्नेह; छवि बनाए रखने को सतर्क। शिक्षा घर चलाने में। ससुराल त्रास/अफवाह की सावधानी; संबंधियों से वार्ता सावधानी। कलह से बच्चों पर असर।
स्वास्थ्य
बार-बार बुखार, अतिसार, अस्थमा। जातिकाओं को गर्भाशय संबंधी छोटी तकलीफ भी उपेक्षा न करें। गंडमूल।
शास्त्रीय रोग-संकेत · उपचार
रोग-संकेत: पित्त, चित्त व्याकुलता
उपचार: पारंपरिक उल्लेख: चिरचिटा-मूल बंधन।
पारंपरिक ज्योतिषीय उल्लेख मात्र — चिकित्सा सलाह नहीं।
- आकृति
छतरी / कुंडल · Umbrella / Earring- सीमा
- वृश्चिक 16°40′–30°
- दशा स्वामी
- बुध (Mercury)
- देवता
- इंद्र (Indra)
- संज्ञा
- तीक्ष्ण/दारुण
- योनि · नाड़ी
- मृग · आदि · गंडमूल
- गण
- राक्षस



























