परिचय
मूल तक पहुँचना। विघटन के बाद नवनिर्माण; केतु स्वामी।
देवता निरृति/राक्षस; केतु स्वामी; गंडमूल।
जन्मफल · शास्त्रीय संकेत: वाक्चतुरता के साथ अविश्वास/कृतघ्नता की शास्त्रीय सावधानी; धनयोग।
आकृति
आकर्षक; हृष्ट-पुष्ट शरीर, चमकीले नेत्र, मधुर स्वभाव।
स्वभाव
शांतिप्रिय, सिद्धांतवादी, पराजय न मानने वाले; दृढ़ संकल्प पूरा करते हैं। ईश्वर आस्था — “प्रभु भरोसे”। दूसरों को अच्छी सलाह, अपने मामले लापरवाह। ईमानदारी के साथ अस्थिर मति; परिवर्तनशील जीवन। आय से अधिक व्यय — अंकुश आवश्यक। प्रतिभा विदेश में चमकती।
शिक्षा / कर्म
लेखन, कला, सामाजिक क्षेत्र; विदेश में आशातीत लाभ।
विवाह · जातक
पारिवारिक जीवन सुखी; पत्नी अच्छी। परिवार से समर्थन सीमित — स्वयं जीवन गढ़ते।
विवाह · जातिका
शुद्ध हृदय, उदार; घोर हठ से विवाद। वैवाहिक जीवन बहुत सुखी नहीं — अलगाव आशंका; विवाह विलंब।
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य विशेष ध्यान; मादक पदार्थों से पूर्णतः बचें — लत अति कर देती है। जातिकाएं वातरोग जल्दी। गंडमूल।
शास्त्रीय रोग-संकेत · उपचार
रोग-संकेत: सन्निपात ज्वर, उदर दर्द, मंद रक्तचाप
उपचार: पारंपरिक उल्लेख: मंदार-मूल बंधन।
पारंपरिक ज्योतिषीय उल्लेख मात्र — चिकित्सा सलाह नहीं।
- आकृति
जड़ें · Bunch of Roots- सीमा
- धनु 0°–13°20′
- दशा स्वामी
- केतु (Ketu)
- देवता
- निऋति (Nirriti)
- वर्ण · जाति
- उग्र जाति
- संज्ञा
- तीक्ष्ण/दारुण
- योनि · नाड़ी
- श्वान · आदि · गंडमूल
- गण
- राक्षस



























