परिचय
पितरों की कृपा और प्रतिष्ठा। नेतृत्व–परंपरा; केतु दशा स्वामी।
देवता पितर; सिंह राशि में गंडमूल समूह।
जन्मफल · शास्त्रीय संकेत: अभिमान की सावधानी; पुण्यात्मा स्वभाव, मान-धन और स्त्री-प्रभाव का योग।
आकृति
मध्यम कद, रोमावलि युक्त शरीर, निर्दोष भाव-भंगिमा; गरदन प्रमुख। पाँच तारे — मकान जैसी आकृति। जातिकाएं सुंदर-आकर्षक।
स्वभाव
ईश्वरभीरु, बड़ों का आदर, मृदुभाषी; विज्ञान-कला रुचि; शांत, विद्वान सम्मान। सुविचारित योजना; गर्ममिजाज पर सच्चाई प्रिय। निःस्वार्थ समाजहित।
शिक्षा / कर्म
अति-ईमानदारी से आधुनिक व्यवसाय कठिन हो सकता है; नौकरी/व्यवसाय में मृदु व्यवहार से संतुलन। वैज्ञानिक विषय पैठ।
विवाह · जातक
वैवाहिक जीवन प्रायः सुखी।
विवाह · जातिका
ईश्वरनिष्ठ, निःस्वार्थ सहायक; गृह व ऑफिस दक्ष। गुस्सा प्रबल — पारिवारिक अशांति की सावधानी; पति-परिवार से दूरी का आरोप।
स्वास्थ्य
सूर्य चरणों में दुर्बलता/थकान; गंडमूल — स्वास्थ्य और शांति-कर्म पर विशेष ध्यान।
शास्त्रीय रोग-संकेत · उपचार
रोग-संकेत: आधाशीशी
उपचार: पारंपरिक उल्लेख: भृंगराज-मूल बंधन।
पारंपरिक ज्योतिषीय उल्लेख मात्र — चिकित्सा सलाह नहीं।
- आकृति
सिंहासन · Throne- सीमा
- सिंह 0°–13°20′
- दशा स्वामी
- केतु (Ketu)
- देवता
- पितृ (Pitris)
- वर्ण · जाति
- वैश्य वर्ण
- संज्ञा
- उग्र/क्रूर
- योनि · नाड़ी
- मूषक · अंत्य · गंडमूल
- गण
- राक्षस



























